Mohit Yadav × Zabiya Moin

जब दो मज़हब मिले, तो एक मोहब्बत की कहानी बनी।

कुछ कहानियाँ सिर्फ़ पढ़ी नहीं जातीं… महसूस की जाती हैं। वालेकुम-प्रणाम एक ऐसी प्रेम कहानी है जहाँ दो अलग संस्कृतियाँ, दो परिवार और दो दुनियाएँ एक रिश्ते के ज़रिए एक-दूसरे से मिलती हैं।

₹399 · डिलीवरी चार्ज ₹50
वालेकुम-प्रणाम Book Cover

एक कहानी, जो मज़हबों की दीवार से परे धड़कती है

मोहित यादव और ज़बिया मोइन — दो अलग नाम, दो अलग इबादतगाह, मगर एक जैसी धड़कन। यह किताब उस पल से शुरू होती है जब एक "प्रणाम" का जवाब "वालेकुम" में मिलता है, और वहीं से एक रिश्ता अपनी पहचान गढ़ने लगता है।

यह सिर्फ़ प्रेम की नहीं, सब्र की भी कहानी है — घरवालों की खामोश नाराज़गी, समाज के सवाल, और उन दो लोगों की ज़िद जो अपने रिश्ते को किसी मज़हब के हवाले नहीं करना चाहते। वालेकुम-प्रणाम बताती है कि मोहब्बत जब सच्ची हो, तो वह हर सरहद को अपने अंदाज़ में पार कर लेती है।

वालेकुम-प्रणाम पुस्तक का कवर
Mohit and Zabiya

हमारा सफ़र

हर किताब के पीछे एक असली एहसास होता है। मोहित और ज़बिया की यह कहानी भी उन्हीं छोटे-छोटे लम्हों से बनी है — एक मैसेज, एक मुलाक़ात, फिर धीरे-धीरे दो अलग दुनियाओं का एक-दूसरे में घुल जाना।

यह सफ़र आसान नहीं था, लेकिन हर मुश्किल ने उनके रिश्ते को और गहरा किया। वालेकुम-प्रणाम इसी सफ़र को शब्दों में समेटने की एक ईमानदार कोशिश है।

किताब के अंदर क्या मिलेगा

वालेकुम-प्रणाम में कई भाव और मोड़ हैं, जो हर पाठक को अपनी ही कहानी जैसे लगेंगे।

मोहब्बत, जो मज़हब से परे पनपी

दो अलग मज़हबों के बीच जन्मी एक मोहब्बत — जिसमें फर्क भी थे, और एक-दूसरे को समझने की कोशिश भी।

लड़ाइयाँ, गलतफहमियाँ और टूटने के पल

रिश्ते को बचाने के लिए एक-दूसरे से, हालात से और उन दर्दनाक पलों से जूझना, जब सब कुछ बिखरता हुआ लगा।

परिवार, समाज और रिश्तों का टकराव

घर की नोकझोंक, बदलते रिश्ते और वे सवाल, जो तब सामने आए जब दो लोगों की निजी कहानी परिवार और समाज से टकराई।

दो मज़हब, दो संस्कृतियाँ

रस्मों, सोच और परंपराओं के फर्क के बीच एक-दूसरे की दुनिया को समझने और अपनाने का सफ़र।

पॉलिटिक्स और समाज की दख़ल

जब एक निजी प्रेम कहानी के बीच बाहर की दुनिया की राजनीति, सामाजिक सोच और पहचान के सवाल आ खड़े हुए।

आँसू भी, हँसी भी और शरारतें भी

क्योंकि यह सिर्फ़ संघर्ष की कहानी नहीं — इसमें मस्ती, हँसी, छोटे खूबसूरत पल और साथ बिताए यादगार लम्हे भी हैं।

लेखक

Mohit Yadav

Mohit Yadav

इस कहानी के लेखक, जिन्होंने अपने निजी अनुभवों को ईमानदारी से शब्दों में उतारा है — ताकि हर पाठक इस सफ़र को अपने जैसा महसूस कर सके।

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एक सलाम का जवाब… और दो दिलों की पूरी कहानी। वालेकुम-प्रणाम को घर बैठे मंगवाएँ और इस दिल छू लेने वाले सफ़र का हिस्सा बनें।

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